मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

  Ravish kumar (ndtv waale)  Quasba naam se blog likhte hai. Unka ye lekh padha to socha aap sab se v sajha kiya jaye...padhiye maza aayega....neeche ravish ke blog ka link v hai

 

सिनेमा का सुहागरात

पता नहीं कहाँ से ख़ुराफ़ात सूझी कि सुहागरात के फ़िल्मी दृश्यों पर लिखने का मन करने लगा । जानना चाहता हूँ कि हिन्दी सिनेमा में सुहागरात का सीन कैसे प्रवेश करता है । शुरू के सुहागरात के दृश्य किस तरह के होते होंगे । जैसे ही नायक दरवाज़ा बंद करता है एक नई दुनिया दर्शकों के सामने नुमायां होने लगती है । शादी के बाद कमरे में प्रवेश करने का सीन हमेशा से पुरुषों के लिहाज़ से रचा गया । उसका प्रवेश करना एक किस्म का एकाधिकार है । ब्याह कर लाई गई दुल्हन पलंग पर शिकार की तरह बैठी होती है । वो सिर्फ एक हासिल है । सुहागरात के सीन में एक पुरुष दर्शक किस एकाधिकार से प्रवेश करता है और एक महिला दर्शक कैसे प्रवेश करती है मालूम नहीं । इसका किसी ने अध्ययन किया हो तो बताइयेगा । हिन्दी फ़िल्मों ने हमीमून भले ही पश्चिम से चुराया है मगर सुहागरात मौलिक आइडिया लगता है । सुहागरात के दृश्यों ने आम वैवाहिक जीवन की 'पहली रात' को कितना रोमांटिक और ख़ौफ़नाक बनाया इसका विश्लेषण होना बाक़ी है । अव्वल तो आप और हम सब जानते हैं मगर हमने कभी इसे सार्वजनिक नहीं किया है ।

जैसे सुहागरात के सीन में दूध का ग्लास कब प्रवेश करता है । दूध का ग्लास सिर्फ मर्द के लिए क्यों होता है और औरत क्यों नहीं पीती है। दूध का ग्लास कई रूपों में आता है । साज़िश, ज़हर, शरारत और भय के रूप में । ननद या सौतेली सास जब दूध का ग्लास लेकर आती है तो बैकग्राउंड म्यूज़िक 'पहली रात' को आख़िरी सीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता । दूध के ग्लास का गिर जाना एक किस्म का इंकार है । सिनेमा में  प्रेम से ज्यादा हवस के सुहागरात दिखाये गए होंगे । बल्कि कब प्रेम से हवस में बदला ।उसी तरह से दूल्हे के आने का अंदाज़ भी सुहागरात का पेटेंट सीन है । शराब के नशे में , पागल दूल्हा, बेवकूफ दूल्हा , बूढ़ा दूल्हा आदि आदि के प्रवेश करने का अंदाज़ भी खास तरह से गढ़ा गया होगआ । नशे और उम्र के कारण  लड़खड़ाने के बाद भी पुरुष का एकाधिकार बना रहता है ।

सुहागरात के सीन में दिखाये गए दूल्हा दुल्हन के प्रकार की भी सूची बननी चाहिए । हिन्दी सिनेमा के निर्देशकों ने सुहागरात को भयावह भी बनाय है । भ्रष्टाचार फ़िल्म में शिल्पा शिरोडकर पर फ़िल्माया गया है । यू ट्यूब में जैसे ही सुहागरात टाइप किया पता नहीं यही एक दृश्य क्यों बार बार उभरता रहा । यू ट्यूब में अपलोड करने वाले ने इस दृश्य को किस नज़र से देखा होगा बार बार सोचता रहा । खलनायक की अतिमर्दानगी विचित्र है । दूल्हे की नपुंसकता का सीन भी एकाधिकार के फ़्रेम में शूट हुआ है । दुल्हन को छूने और साथ में अलग तरह की संगीत रचना भी सुहागराती सीन है । दूल्हा हमेशा या कई बार दोस्तों के पी पा के बाद ही कमरे में आता है । सिर्फ । दुल्हन ही कमरे में पहले से बैठी रहती है ।

सुहागरात की बात हो और सेज़ की न हो ठीक नहीं लगेगा । सेज़ मतलब एक प्रकार का स्टेज समझिये । जहां दोनों का ' सीन' परफार्म होता है । 'गजरे के सफ़ेद फूलों से लदा पलंग । आख़िरी सीन में फूलों की लड़ियों का टूटना, दुल्हे की कलाई और दुल्हन के जूड़े में गजरा । सेज़ को लेकर गाने भी खूब लिखे गए है । बेला चमेली का सेज़ बिछाया सोवै गोरी का यार बलम तरसे रंग बरसे । सुहागरात में सेज़ कैसे बदलता है यह भी देखना है । कैमरा कैसे दुल्हन के पाँव का क्लोज़ अप करता है, पायल कैसे रगड़ खाकर टूटती है । इन सबको स्त्री को अधीन बनान वाले  दृश्यों और प्रसंगों को रूप में देखा जाना चाहिए । यह एक किस्म का भयानक कंस्ट्रक्ट है जिसे रोमांटिक समझ कर लोग आम जीवन में उतारते हैं । गाँव गाँव में सुहागरात के सीन की असली नक़ल होती रही है । सबकी निगाहों से बचाकर फूल लाये जाते हैं । दरवाज़ा बंद कर भीतर ही भीतर कमरे को वैसे ही सजा दिया जाता है जैसे फ़िल्मों में दिखाया जा चुका होता है । आपमें से कितनों के जीवन में सिनेमा के यह दृश्य रचें गए, इसका वृतांत इतना गुप्त क्यों हैं । क्या दुल्हन वैसे ही बिस्तर पर घूँघट में बैठी थी जैसे सिनेमा ने दिखाया था । कितना कुछ है जानने को ।

जैसे ही मैंने यू ट्यूब पर सुहागरात टाइप किया सुहागरात के अनगिनत मल़याली दृश्यों से घिर गया । लगता है मल़याली फ़िल्मों में सुहागरात ख़ासा कमाऊ सीन है । पर सभी फ़िल्मों के नहीं थे । पर कई में मल़याली 'हाट बेब' के साथ सुहागरात टाइप कुछ लिखा देखा । आप ज़्यादा कल्पना न करें इसे पढ़ते हुए । मैंने इन दृश्यों को चला कर नहीं देखा है । डर्टी माइंड ! पर मैं गंभीर हूँ । सिनेमा में सुहागरात पर लिखना चाहता हूँ । कुछ फ़िल्मों के नाम और असली जीवन के प्रसंगों की चर्चा करें तो अच्छा रहेगा । हाल की फ़िल्मों में सुहागरात के सीन कम हो गए हैं । कई फ़िल्में देखी हैं पर सुहागरात का कोई सीन याद नहीं आ रहा । शायद यह सीन अब पकाऊ हो गया है इसीलिए निर्देशकों को इसमें अब वो पहली रात वाली बात नज़र नहीं आती या फिर दुल्हन का किरदार ही स्वतंत्र हो गया है ।

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