मैं एक कमज़ोर आदमी हूँ
एक ख्वाब देख लू तो फूलने लगती हैं छाती लड़खड़ा कर गिर देता हु ख्वाब
त्तुम एक मजबूत औरत हो,जिसने मेरी भुरभुरी पसलियों के लिए
लोहे के कपडे सिल दिए
मेरे कापते कंठ में बांध दिए तुमने हौसले के गीत
मुझे सीखाया कि छाती घुटनों से टाँके बिना चलना संभव हैं
आज तुम जब ख्वाब हो मेरा ,चाहता हूँ ताबीर
तो खींचती हो कदम पीछे
देखो मुझे,मेरे पाँव जमीन पर है स्थिर
मेरी रीढ़ सीधी है,मैं पलायन से मुकर चूका हूँ
न हो यू लाचार असहाय
प्लीज़ ..मैं तुम्हे खंडित नहीं देख सकता
सुनो।।।आस्था का टूट जाना अच्छा नहीं होता।।।
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